'नॉन-कोर कारोबार की समीक्षा करें बैंक'

ग्लोबल बैंक कर रहे हैं नॉन-कोर कारोबार से एक्जिट
भारतीय बैंकों के बीच बीमा जैसे नए सेक्टरों में उतरने की बढ़ती चाहत के बीच वित्त मंत्रालय ने इन्हें इन कारोबार में अपने एक्सपोजर की समीक्षा करने को कहा है। इसकी वजह यह है कि वित्त मंत्रालय चाहता है कि बैंक अपने मूल कारोबार को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दें।साथ ही, पूंजी को सुरक्षित रखना भी इस कवायद का एक महत्वपूर्ण मकसद है।
वित्त मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने कहा कि बड़े ग्लोबल बैंक गैर-प्रमुख कारोबार से एक्जिट करते जा रहे हैं, ताकि पूंजी को सुरक्षित रखना चाहिए। दूसरी तरफ, घरेलू बैंक एक के बाद एक नए कारोबार शुरू कर रहे हैं। ऐसे में घरेलू बैंकों को भी गैर-प्रमुख कारोबार में अपनी गतिविधियों की समीक्षा करनी चाहिए।
भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा व केनरा बैंक समेत कई प्रमुख बैंकों ने जीवन बीमा, साधारण बीमा व म्यूचुअल फंड जैसे कारोबार के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित किए हुए हैं। दूसरी ओर, बैंकों को बेसल-3 मानकों के अनुपालन के लिए काफी अतिरिक्त पूंजी की जरूरत है। इस काम में बैंकों की मदद के लिए सरकार ने मार्च, 2013 तक 12 बैंकों को 12,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी देने की कवायद भी शुरू कर रखी है। बेसल-3 मानक 1 जनवरी, 2013 से लागू होने थे, लेकिन रिजर्व बैंक ने फिलहाल इन्हें तीन माह के लिए टाल दिया है।
रिजर्व बैंक ने बेसल-3 मानकों के लिए अधिसूचना पिछले साल मई माह में जारी की थी। इसके तहत चरणबद्ध रूप से जोखिम वाली कुल परिसंपत्तियों के बदले बैंकों की कोर-कैपिटल को वर्ष 2018 तक बढ़ाकर सात फीसदी के स्तर पर ले जाना है। आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव ने पिछले दिनों कहा था कि बेसल-3 मानकों के अनुपालन के लिए बैंकों को पांच लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी।







