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गैर-टेलीकॉम कंपनियों को हिस्सा बेचने पर नई दर नहीं

बिजनेस ब्यूरो | Jan 07, 2013, 00:39AM IST
गैर-टेलीकॉम कंपनियों को हिस्सा बेचने पर नई दर नहीं

क्या कहा चंद्रशेखर ने
अगर कोई गैर-टेलीकॉम कंपनी किसी टेलीकॉम कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना चाहती है, तो उसके लिए हिस्सेदारी बेचने के मौजूदा नियम ही लागू होंगे। शेयर ट्रांसफर संबंधी मौजूदा नियम, पिछले वर्ष कैबिनेट द्वारा विलय पर लिए गए फैसले से अलग हैं।
क्या था सरकार का निर्णय
सरकार ने 8 नवंबर,2012 को यह निर्णय लिया था कि जिस कंपनी के पास पुरानी दरों पर खरीदा गया स्पेक्ट्रम है, उसका अधिग्रहण हो जाने की हालत में नई कंपनी को लाइसेंस वैधता की बाकी अवधि के लिए नई दरों पर शुल्क लिया जाएगा

सरकार ने कहा है कि 1,658 करोड़ रुपये की पुरानी दर पर जिन कंपनियों ने स्पेक्ट्रम खरीदा है, वे किसी गैर-टेलीकॉम कंपनी के हाथों स्पेक्ट्रम की बिक्री कर सकती हैं। लेकिन इसमें पिछले वर्ष बाद के दिनों में कैबिनेट द्वारा जारी की गई शर्तों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।


सरकार ने 8 नवंबर,2012 को यह निर्णय लिया था कि जिस कंपनी के पास पुरानी दरों पर खरीदा गया स्पेक्ट्रम है, उसका अधिग्रहण हो जाने की हालत में नई कंपनी को लाइसेंस वैधता की बाकी अवधि के लिए नई दरों पर शुल्क लिया जाएगा। टेलीकॉम सेक्रेटरी आर. चंद्रशेखर ने कहा कि कैबिनेट का यह फैसला इक्विटी की बिक्री के बारे में नहीं है।कैबिनेट का यह फैसला लाइसेंस के विलय के बारे में है। स्पेक्ट्रम की नई दरें, पुरानी दरों के मुकाबले लगभग सात गुना ज्यादा हैं।


सरकार ने 22 में से 18 सर्किल के लिए नई स्पेक्ट्रम दरें 14 नवंबर,2012 को खत्म हुई नीलामी में तय कर दिया था।लेकिन इस नीलामी में दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और कर्नाटक के लिए किसी भी कंपनी ने बोली नहीं लगाई थी। इसलिए सरकार इन सर्किल में एयरवेब्स की दोबारा नीलामी की प्रक्रिया पर काम कर रही है।इसके लिए सरकार ने इन सर्किल में स्पेक्ट्रम की दरें भी 30 फीसदी कम रखी हैं।


सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया था, ताकि टेलीकॉम कंपनियां हालिया स्पेक्ट्रम नीलामी से खुद को दूर नहीं रखें। कुछ कंपनियां इस फिराक में थीं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी,2012 में जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द नहीं किए गए थे, उनका अधिग्रहण अखिल भारतीय स्तर पर 4.4 मेगाहट्र्ज के स्पेक्ट्रम के लिए 1,658 करोड़ रुपये की पुरानी दरों पर कर लिया जाए। इससे उन्हें नई नीलामी में हिस्सा लिए बगैर पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम हासिल हो जाता।


चंद्रशेखर ने कहा कि कुछ कंपनियों की इसी तैयारी को भांपते हुए कैबिनेट ने यह शर्त आयद कर दी कि अगर किसी पुरानी कंपनी का अधिग्रहण किया गया, तो पैरेंट कंपनी को नई दरों पर बाकी अवधि के लिए स्पेक्ट्रम का शुल्क देना पड़ेगा। अगर यह शर्त नहीं लगाई जाती, तो कुछ कंपनियां स्पेक्ट्रम नीलामी लिए बगैर पुरानी कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती थीं।


उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई गैर-टेलीकॉम कंपनी किसी टेलीकॉम कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना चाहती है, तो उसके लिए हिस्सेदारी बेचने के मौजूदा नियम ही लागू होंगे। उन्होंने कहा कि शेयर ट्रांसफर संबंधी नियम बिलकुल अलग हैं।

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