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भविष्य को संवारने वाले नए साल के संकल्प

 
Source: मणिकरण सिंघल   |   Last Updated 01:28(21/01/12)
 
 
 

नये साल की शुरुआत सशक्त फाइनेंशियल प्लानिंग के संकल्प के साथ करें ताकि न केवल भविष्य के आर्थिक लक्ष्यों को पाने में आसानी हो बल्कि आप किसी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने में भी आर्थिक रूप से सक्षम हों।

लीजिए एक और साल खत्म होकर दूसरा शुरू भी हो गया और एक बार फिर हम नए साल के  संकल्पों के लिए तैयार हो गए जो मामले सुधार लायक होते हैं, उन्हें सुधारने के लिए संकल्प किए जाते पर अगर ठीक से सोच कर संकल्प किए जाएं तो भी उनके टूटने की संभावना होती है। इसका साफ कारण यह है कि संकल्प का मतलब व्यवहारगत बदलाव होता है। पर यह बदलाव मुश्किल होता है। आप जानते हैं कि खर्चों का बजट बनाना अलग बात है पर उस पर अमल करना अलग बात होती है।


फाइनेंशियल प्लानिंग का संकल्प भी कुछ ऐसा ही होता है। लोग यह जानते हैं कि वे अगर इस पर अमल नहीं करेंगे तो वे आर्थिक मुसीबत में पड़ सकते हैं, पर इसके  बावजूद वे टाल-मटोल करते हैं या दूसरा विकल्प तलाशते हैं। पिछले साल मुझे भी संकल्पों के कार्यान्वयन में परेशानी हुई। इसके लिए नहीं कि मैं महत्व नहीं समझता था बल्कि इसलिए कि मेरी पत्नी ही नहीं समझ पाई। पर आखिरकार मैं उसे समझा पाने में सफल हुआ। उन्हीं अनुभवों को मैं आपके साथ बांट रहा हूं। इसे आप न केवल इस साल बल्कि पूरी जिंदगी काम में लाइए।


खर्च-बचत का लेखा-जोखा
उसे इमरजेंसी फंड व रिटायमेंट प्लानिंग का महत्व समझाने के लिए मैंने वेतन का चेक घर न लाने का फैसला किया। मैं कुल रकम को लिक्विड फंड के रूप में कहीं रखता गया। यह महसूस कराने के लिए कि पर्याप्त पैसा न होने पर कैसा लगता है और उन हालातों का अनुभव करने के लिए जब पैसे का प्रवाह वास्तविक रूप से बंद हो जाता है।


हमने मौजूदा बचत से काम किया जो कि तकरीबन ढाई महीने चली। पहले महीने तो कुछ नहीं लगा। पर दूसरे महीने खर्चों की सूची हम बनाने लगे तथा अपनी जीवनशैली से समझौता करने लगे ताकि अगले महीने का इंतजाम हो सके।


इससे उसे नौकरी जाने या रिटायरमेंट के  उन हालातों की वास्तविक स्थिति का पता चला जब नियमित आय का प्रवाह बंद हो जाता है। लिहाजा अगले दिन उसने आकस्मिक फंड के लिए प्रावधान करने का संकल्प किया और आने वाले तीन महीनों में एक अच्छी खासी रकम भी जमा कर डाली। उसे बजटिंग व गैर जरूरी खर्चों के प्रबंधन का महत्व मालूम हो चुका था।


खर्च और बचत का बजट
कुछ महीनों के बाद मुझे महसूस हुआ कि खर्चों के साथ बजट के मोर्चे पर भी वह सतर्क हो गई है। मैंने उसे निवेश का महत्व समझाना शुरू कर दिया। उसे चक्रवृद्धि, टैक्सों का सिद्धांत व मुद्रास्फीति के बारे में बताया। उसे लग गया कि पैसे को बचत खाते में भी रखना ठीक नहीं है। ठीक उसी समय उसने हर महीने की आय का न्यूनतम 20' निवेश करने का संकल्प लिया।


सामाजिक जिम्मेदारी भी
जब 20% बचत और इसे जरूरत के अनुसार यानी  लक्ष्यों का फैसला होने के समय बढ़ाने का हो गया तो वह भी अन्य लोगों की तरह थोड़ा कन्फ्यूज्ड भी हो गई। चूंकि हम किराये के घर में रहने वाले हैं लिहाजा लक्ष्य था एक घर खरीदना। और हां अन्य महिलाओं की तरह वह हीरे खरीदना व छुट्टियों में विदेश की सैर करना चाहती थी।


पर चूंकि मैं अपनी माली हालत जानता था लिहाजा मैंने उसे अपने नकदी प्रवाह व नेट वर्थ के बारे में समझाया। फिर मैंने उसे कुछ प्रॉपर्टी डीलरों से मिलवाया कुछ निर्माणाधीन परियोजनाएं दिखाई। हमारा नकदी प्रवाह हालांकि संभावित ईएमआई के लायक नहीं था पर वह बहुत रोमांचित थी मानो उसे अगले महीने वेतन वृद्धि मिलने वाली हो। मैंने उसे लक्ष्य व प्राथमिकताएं लिखने को कहा। तब मैं यह देख क र चकित रह गया कि इस बार उसने प्राथमिकताओं में हीरे व विदेश में अवकाश लिखा ही नहीं।


इसकी बजाय उसका लक्ष्य सुरक्षित रिटायरमेंट व बच्चों के भविष्य की योजना-हालांकि उस समय हमारे पास कोई बच्चा भी नहीं था, बनाने पर फोकस था। फिर वह इतना सावधान हो गई कि उसने सप्ताहांत में भी घर पर खाना पकाने का फैसला कर लिया ताकि हम उस बचत को अनाथालय और ओल्ड एज होम को दान कर सकें। हमने जन्मदिन की पार्टी के खर्च, सप्ताहांत के सिनेमा में कटौती की ताकि हम अपने अवकाश में और भी रोमांचक जगह जा सकें।


अपनी सेहत की देख-भाल
कुछ चीजें भले ही आपकी प्राथमिकता सूची में न हों फिर भी आपको उस पर काम करना है। कई ऐसे भी मौके आते हैं जब फिटनेस के प्रति एकदम सावधान इंसान को भी खराब सेहत के दौर से गुजरना पड़ जाता है। हालांकि हम अमूमन अपनी सेहत के प्रति संतुलित आहार, नो स्मोकिंग, नो ड्रिंकिंग व नियमित कसरत कर सावधान भी रहते हैं, पर सेहत का सही रहना अपने हाथ में नहीं होता। लिहाजा इसे वित्तीय रूप से प्रबंधित करें और पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट व क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस लें।


मैं जानता था कि मेरी पत्नी इसे यह कहेगी कि उसके नियोक्ता ने 3 लाख रुपये का बीमा कवरेज मुहैया कराया है। पर जब मैंने उसे अपने एक डॉक्टर मित्र से मिलवाया जो कि हर साल अपने मेडिक्लेम का सम एश्योर्ड बढ़वा देता था, उस समय उसका कवरेज 15 लाख रुपये का था। डॉक्टर से चर्चा के बाद वह न केवल अच्छे कवर के लिए तैयार हो गई बल्कि उसने हर महीने कुछ रुपये ऐसे मरीजों के लिए भी बचाने शुरू करने का संकल्प ले लिया जो कि महंगे इलाज नहीं करवा सकते।


यह पूरी कहानी आपसे बांटने के पीछे मेरा ध्येय सिर्फ इतना है कि आप अपने संकल्प पर कायम तभी रह पाएंगे जब आप वास्तव में गंभीर व जुनूनी रहेंगे। अगर आप अनुभव करेंगे तो आप उस पर अमल भी करेंगे। संकल्प करने के लिए आपको सिर्फ 31 दिसंबर की ही आवश्यकता नहीं है, आप इसे साल के किसी भी दिन कर सक ते हैं। संकल्प करना कठिन नहीं पर इस पर टिके रहना अवश्य कठिन है।


- लेखक सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर और द फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड इंडिया के सदस्य हैं।

 
 
 
 
 
 
 
 
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