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कृषि क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये ज्यादा कर्ज

 
Source: आर.एस. राणा नई दिल्ली   |   Last Updated 01:53(01/02/12)
 
 
 

अगले वित्त वर्ष में खेती के लिए 5.25 लाख करोड़ रुपये कर्ज मिलने की संभावना
कृषि क्षेत्र की अहमियत
प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा बिल सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। इसलिए वर्ष 2012-13 के आम बजट में किसानों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर ज्यादा जोर रहेगा। इसी अहमियत को देखते हुए कृषि क्षेत्र को ज्यादा कर्ज दिए जाने की योजना है।

देश की अर्थव्यवस्था में खेती-बाड़ी की अहमियत को देखते हुए सरकार आम बजट में किसानों को दिए जाने वाले कृषि ऋण में 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है। कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में 4.75 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया था जबकि वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में यह राशि बढ़ाकर 5.25 लाख करोड़ रुपये करने की योजना है।



कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2012-13 के बजट में कृषि ऋण देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर कुल 5.25 लाख करोड़ रुपये कर्ज देने की योजना है।


पिछले बजट में इसके लिए 4.75 लाख करोड़ के कर्ज कृषि क्षेत्र को देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि ब्याज की दरों में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। इस समय किसानों को 7 फीसदी की दर पर फसली कर्ज दिया जाता है। तय समय पर कर्ज अदा करने वाले किसानों को सरकार की ओर से तीन फीसदी ब्याज की रियायत दी जाती है, जो वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में भी जारी रह सकती है।


अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा बिल सरकार की पहली प्राथमिकता है तथा इसके लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। इसलिए वर्ष 2012-13 के आम बजट में किसानों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर ज्यादा जोर रहेगा। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में कृषि ऋण देने के लिए सरकार ने 4.75 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया हुआ है


जिसमें से पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर के दौरान 2.23 लाख करोड़ रुपये के ऋण आवंटित किए गए। उन्होंने बताया कि पहले छह महीनों के मुकाबले अगले छह महीनों में ज्यादा कर्ज दिए जाते हैं। ऐसे में चालू वित्त वर्ष में कुल लक्ष्य के मुकाबले ज्यादा ऋण वितरित किए जाने की संभावना है।


सरकार ने वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में कृषि ऋण देने के लिए 3.75 लाख करोड़ रुपये के कर्ज देने का प्रावधान किया गया था जबकि इस दौरान देश में कुल वितरित कर्ज की राशि बढ़कर 4.46 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। इस दौरान देशभर के 5.50 करोड़ किसानों ने इसका लाभ लिया था। इसी तरह से वित्त वर्ष 2009-10 के बजट में कृषि ऋण के लिए सरकार ने 3.25 लाख करोड़ रुपये के कर्ज देने का लक्ष्य रखा था


लेकिन कुल ऋण 3.84 लाख करोड़ रहे। इस दौरान देशभर के 4.82 करोड़ किसानों को कर्ज मिले। वित्त वर्ष 2008-09 के बजट में भी कुल 2.80 लाख करोड़ रुपये लक्ष्य के मुकाबले किसानों को 3.01 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए।

 
 
 
 
 
 
 
 
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