चीन के तीन अग्रणी बैंक अनिल धीरुभाई अंबानी समूह (एडीएजी)की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के विदेशी कर्ज को रि-फाइनेंस करने पर सहमत हो गए हैं। पूंजी जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना कर रहे समूह के लिए यह खासी राहत की बात है। कंपनी का यह विदेशी कर्ज 6,125 करोड़ रुपये के बराबर है। किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेशी कर्ज की रि-फाइनेंसिंग का यह अब तक का सबसे बड़ा करार है।
चीन के जिन बैंकों ने इस करार में शामिल होने पर सहमति जताई है, उनमें इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी), चाइना डेवलपमेंट बैंक (सीडीबी) और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना (एक्जिम) शामिल हैं।
यह तीनों बैंक मिलकर रिलायंस कम्युनिकेशंस के 118.2 करोड़ डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी) को रि-फाइनेंस करेंगे। कंपनी को इन बांड को 1 मार्च, 2012 को रिडीम करना था यानी वापस खरीदना है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने कहा है कि इसे सात साल की बढ़ी हुई मैच्योरिटी अवधि का तो फायदा मिलेगा ही, साथ ही इसकी ब्याज लागत भी 5 फीसदी के बेहद आकर्षक स्तर पर आ जाएगी। सितंबर, 2011 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान रिलायंस कम्युनिकेशंस पर कुल मिलाकर 32,000 करोड़ रुपये का कर्ज था।
इस खबर के असर से रिलायंस कम्युनिकेशंस समेत एडीएजी ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयरों में खासी लिवाली देखी गई। बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर आर-कॉम के शेयर का भाव 2.78 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 88.25 रुपये पर बंद हुआ। इसके साथ ही, रिलायंस कैपिटल के शेयर के भाव में 3.97 फीसदी, रिलायंस पावर में 2.25 फीसदी और रिलायंस इंफ्रा में 4.62 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।