विज्ञापन
 
 
 
 

धारा 80सी के अतिरिक्त भी हैं कर-बचत के विकल्प

 
Source: जितेंद्र सोलंकी, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर,   |   Last Updated 01:39(21/01/12)
 
 
 

मैं 15 फरवरी से पहले आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर बचत के लिए निवेश करना चाहता हूं। लेकिन मैं यह तय नहीं कर पा रहा कि किन विकल्पों का चयन करें। कर देनदारी घटाने के उपलब्ध विकल्पों के बारे में कृपया जानकारी दें। -रोहित, पानीपत



-धारा 80सी के तहत निवेश के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। जीवन बीमा के प्रीमियम का भुगतान, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, बैंकों के पांच साल वाले फिक्स्ड डिपॉजिट और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम। इसके अलावा भी कई और विकल्प हैं जैसे बच्चे की स्कूल फीस। इसका लाभ आप तभी उठा सकते हैं जब आपका कोई बच्चा स्कूल जाता हो। हालांकि, इनमें से कई विकल्प आपके दीर्घावधि के लक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए कर-बचत की योजना दीर्घावधि के आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए।


उदाहरण के तौर पर जीवन बीमा की खरीदारी बीमा संबंधी जरूरतों का विश्लेषण करने के बाद ही अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए ली जानी चाहिए। इसी तरह, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में तभी निवेश करना चाहिए जब आप इसके जोखिम-रिटर्न को समझते हों क्योंकि यह शेयरों में निवेश करते हैं।


अगर आप कर-बचत के लिए जल्दबाजी में निवेश कर रहे हैं तो आपको बैंकों का फिक्स्ड डिपॉजिट (पांच वर्ष वाले) या नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में निवेश करें क्योंकि ऐसे में आपके पास नियमित योगदान करने का वक्त नहीं होता है। भविष्य में प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही कर-बचत की योजना पर काम शुरू कर दें। इससे आपको अतिरिक्त राशि का आवंटन प्रभावी तरीके से करने में मदद मिलेगी जो आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक साबित होगा।


धारा 80सी के अतिरिक्त आप धारा 80सीसीएफ के तहत लांग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बांडों में 20,000 रुपये तक का निवेश कर आयकर में छूट का लाभ पा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अपने और माता-पिता के मेडिक्लेम के प्रीमियम के भुगतान पर भी आप धारा 80डी के तहत 40,000 रुपये तक की कटौती का लाभ उठा सकते हैं। लेकिन, कवर पर्याप्त लें ताकि यह आपकी प्राथमिक जरूरत- मेडिकल इमरजेंसी के उद्देश्यों को पूरा करता हो।

मैं शादी-शुदा हूं और अगले दो सालों में पिता बनने की प्लानिंग कर रहा हूं। क्या कोई ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है जो मैटरनिटी के साथ-साथ उसके पहले और बाद में होने वाले खर्चों को कवर करता हो?  -राजवीर सिंह, चंडीगढ़
-अधिकांश मामलों में गर्भावस्था के दौरान होने वाले मेडिकल खर्चों को तभी कवर किया जाता है जब पॉलिसी चार-छह साल से लगातार जारी हो। हालांकि, समय के साथ कुछ कंपनियों ने अपने नये प्रोडक्ट में इस समय-सीमा में थोड़ी कटौती की है। प्रोडक्ट जैसे स्टार हेल्थ की वेडिंग गिफ्ट पॉलिसी एक बच्चे के लिए गर्भावस्था के दौरान होने वाले खर्च को कवर करता है लेकिन शर्त यह है कि आप चार साल की पॉलिसी लें।


इसी तरह मैक्स बुपा की कुछ पॉलिसियां हैं जों गर्भावस्था के खर्च के अलावा एक साल तक बच्चे के टीकाकरण के खर्च को भी कवर करती है। हालांकि, यह लाभ तभी मिल पाता है जब पॉलिसी दो साल से जारी हो और इस तरह के प्रोडक्ट के प्रीमियम भी अधिक हो सकते हैं। अपनी जरूरतों को देखते हुए उपयुक्त प्रोडक्ट का चयन करें। हालांकि, इन सभी प्रोडक्ट की अपनी सीमा है इसलिए मेरी सलाह होगी कि अलग से इसके लिए बचत करें ताकि खर्च के घटने-बढऩे पर कोई परेशानी न हो।

मैंने कुछ वर्ष पहले एक म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। उस समय एनएवी 56 रुपये था। लेकिन अब एनएवी घट कर 50.23 रुपये रह गया है। कृपया सलाह दें कि मुझे क्या करना चाहिए?  -कमलेश, इंदौर
-एक इक्विटी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में विभिन्न सेक्टर के कई शेयर शामिल होते हैं और एनएवी या शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य में इन शेयरों के प्रदर्शन के हिसाब से उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। आपके स्कीम के साथ भी ऐसा ही हुआ है। लेकिन एनएवी के आधार पर किसी म्यूचुअल फंड योजना का अच्छा या बुरा होना तय नहीं किया जा सकता।



किसी भी अच्छे डाइवर्सिफायड पोर्टफोलियो में, स्कीम शेयर बाजार के विभिन्न सेक्टरों में इस तरह निवेश करता है कि किसी खास सेक्टर के बुरे प्रदर्शन की भरपाई दूसरे सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन से हो जाती है। हालांकि, अगर किसी कारणवश शेयर बाजार का प्रदर्शन ही बुरा होता है तो अच्छे फंडों के एनएवी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहते।


इसके अलावा गौर करने वाली बात यह भी है कि शेयर बाजार में निवेश का लाभ आपको तभी
बेहतर मिलता है जब आप दीर्घावधि के लिए निवेशित रहते हैं। इस दौरान एनएवी में कई बार उतार-चढ़ाव आ सकते हैं लेकिन दीर्घावधि में यह औसत हो जाता है। इसलिए अपने फंड का विश£ेषण आपको विभिन्न मानदंडों के आधार पर करना चाहिए जैसे पोर्टफोलियो कंपोजिशन, जोखिम और रिटर्न का अनुपात, फंड के खर्चे और पोर्टफोलियो में फेरबदल आदि।



इस विधि से आप फंड की अंतर्निहित नीति की जानकारी पा सकेंगे जिससे सह संकेत मिलेगा कि फंड का प्रदर्शन दीर्घावधि में कैसा रहेगा। फंड में निवेश बनाए रखने या उसे बेचने का निर्णय भी आप इस आधार पर ले सकते हैं।

समाधान :- जितेंद्र सोलंकी, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, जे. एस. फाइनेंशियल प्लानर्स, दिल्ली

 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
10 + 5

 

 
 
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Amazing Body Paintings
Controversies that rocked B-town
Just Added

करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
Bollywood Stars at Cannes
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment