कमजोर सेंटिमेंट के चलते इश्यू लाने से हिचकिचा रहीं वित्तीय कंपनियां

घटता ग्राफ
3,170 करोड़ की राशि जुटाई चालू वित्त वर्ष की पहले आठ माह की अवधि के दौरान वित्तीय सेक्टर की कंपनियों ने
12,490 करोड़ के स्तर पर रहा था बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इनके द्वारा जुटाई गई राशि का आंकड़ा
7,107 करोड़ की राशि जुटाई थी इन कंपनियों ने पब्लिक व राइट्स इश्यू से 2010-11 की समान अवधि के दौरान
क्या है वजह - जब बाजार गिरता है तो रिटेल निवेशकों का भरोसा डगमगा जाता है व बाजार में इनकी रुचि समाप्त हो जाती है। जब तक बाजार में टिकाऊ ग्रोथ नहीं होती, निवेशकों का भरोसा वापस नहीं लौटता। - राजेश जैन, ईवीपी एंड रिटेल रिसर्च हेड, रेलिगेयर सिक्युरिटीज
निवेशकों के कमजोर सेंटिमेंट के चलते वित्तीय सेक्टर की कंपनियां शेयर इश्यू जारी करने को लेकर हिचकिचा रही हैं। इसी वजह से वित्त वर्ष 2012-13 की पहले आठ माह की अवधि के दौरान वित्तीय सेक्टर की कंपनियों द्वारा शेयर इश्यू के जरिए बाजार से जुटाई गई पूंजी में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है।
पूंजी बाजार नियामक सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के ताजा मासिक बुलेटिन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली आठ माह की अवधि के दौरान वित्तीय सेक्टर की घरेलू कंपनियों ने शेयर इश्यू जारी कर बाजार से महज 3,170 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।
जबकि, वित्त वर्ष 2011-12 की समान अवधि के दौरान इन कंपनियों ने बाजार से इस मद में 12,490 करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी। वित्त वर्ष 2010-11 की पहले आठ माह की अवधि के दौरान भी यह आंकड़ा चालू वित्त वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा 7,107 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा था।
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2012-13 की पहले आठ माह की अवधि के दौरान घरेलू बैंकों ने पब्लिक व राइट्स इश्यू के जरिए महज 1,617 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। जबकि, अन्य वित्तीय संस्थानों ने इस मद में महज 1,553 करोड़ रुपये की राशि ही उक्त अवधि के दौरान जुटाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीते सालों के दौरान बाजार के खराब प्रदर्शन के चलते देश में रिटेल निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ था और इसी के मद्देनजर वित्तीय सेक्टर की कंपनियां शेयर इश्यू के जरिए फंड जुटाने से हिचकिचा रही हैं।
रेलिगेयर सिक्युरिटीज के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं रिटेल रिसर्च प्रमुख राजेश जैन कहते हैं कि जब बाजार गिरता है तो रिटेल निवेशकों का भरोसा डगमगा जाता है व बाजार में इनकी रुचि समाप्त हो जाती है। जब तक बाजार में टिकाऊ ग्रोथ नहीं होती, निवेशकों का भरोसा वापस नहीं लौटता।
हालांकि, अब हालात में कुछ सुधार होता हुआ दिख रहा है। सीएनआई रिसर्च के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर किशोर ओस्तवाल कहते हैं कि बैंकों के लिए आम तौर पर फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) के जरिए बाजार से पूंजी जुटाना मुश्किल होता है।
हालांकि, सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, हेल्थकेयर व पेपर एंड पल्प जैसी इंडस्ट्री चालू वित्त वर्ष के दौरान बाजार से शेयर इश्यू के जरिए बीते वित्त वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा राशि जुटाने में कामयाब रही हैं।
चालू वित्त वर्ष की नवंबर माह तक की अवधि के दौरान पेपर एंड पल्प इंडस्ट्री ने पब्लिक व राइट्स इश्यू के जरिए बाजार से 442 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 306 करोड़ रुपये रहा था। जबकि, हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियों ने इस साल उक्त अवधि में बाजार से बीते वित्त वर्ष की समान अवधि की 65 करोड़ रुपये की राशि की तुलना में 210 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।
जैन के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि ये काफी ठोस इंडस्ट्री हैं। दूसरी तरफ, वित्तीय सेक्टर की कंपनियों के पास स्थायी परिसंपत्तियां नहीं होती हैं और इसी वजह से इनमें निवेश करने को लेकर निवेशकों का बहुत ज्यादा भरोसा नहीं होता है। उधर, ओस्तवाल का कहना है कि हेल्थकेयर सेगमेंट की कंपनियों द्वारा जुटाई गई ज्यादा पूंजी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का अच्छा योगदान रहा है।







