छोटी माइक्रो फाइनेंस कंपनियां मुश्किल में
अस्तित्व बचाने के लिए विलय का सहारा ले सकती हैं कंपनियां
देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनियों (एमएफआई) को महत्वपूर्ण तो माना जा रहा है, लेकिन यहां छोटी-छोटी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है। कम पूंजी आधार वाली अनेक एमएफआई अपने कारोबार को चलाने में दिक्कतों का सामना कर रही हैं। इसके लिए बैंकों की ओर से उन्हें सहारा नहीं मिल रहा है।
ऐसे में इन कंपनियों के पास बड़ी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों या वित्तीय संस्थानों के साथ विलय करने का ही विकल्प बच रहा है। एमएफआई के संगठन माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन नेटवर्क (एमएफआईएन) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आलोक प्रसाद ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि छोटी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को बैंकों से फंड जुटाने में परेशानी हो रही है। ऐसे में इन कंपनियों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए विलय का एक रास्ता निकल रहा है।
विलय एवं अधिग्रहण की शुरुआत हो चुकी है। प्रसाद ने बताया, 'कोलकाता की एमएफआई आरोहन फाइनेंस सर्विसेज की अधिकांश हिस्सेदारी इनटेलीकैश माइक्रो फाइनेंस नेटवर्क ने ले ली है। अगले साल ऐसे कुछ और सौदे भी देखे जा सकते हैं। मैं इसे हाथ मिलाना कहूंगा, लेकिन इसमें दो राय नहीं है कि ऐसे माहौल में छोटी कंपनियों के लिए कारोबार कर पाना मुश्किल है।'
उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एमएफआई सेक्टर पर मार्जिन की सीमा कम करने और अनुपालन नियमों का सख्ती से पालन करने का दबाव डाल दिया है। बैंकों की ओर से भी फंड देने के लिए चुनिंदा बड़ी कंपनियों को तवज्जो दी जा रही है। बैंक फंड मुहैया कराने से पहले कॉर्पोरेट गवर्नेंस, कैपिटल बेस, प्रमोटर्स आदि को ध्यान में रख रहे हैं।
यहां छोटी एमएफआई को बड़े प्रमोटर्स का सहारा नहीं मिल पाने से वे इन स्तरों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 24 माह से माइक्रो फाइनेंस सेक्टर मुश्किल दौर से गुजर रहा है। केवल आर्थिक रूप से मजबूत कंपनियां ही इसका सामना कर पा रही हैं। आने वाले दिनों में केवल बड़ी कंपनियां ही कारोबार करती दिखेंगी।









