छात्रों को मिलेगा 14 इंच का लैपटॉप

राज्य सरकार छात्रों को देगी 57 हजार लैपटॉप
योजना - स्कूल व यूनिवर्सिटी के छात्रों को सरकार ने दस के बजाय 14 इंच का लैपटॉप देने का फैसला किया है, ताकि छात्रों के लिए बहुउपयोगी हो सके। छात्रों को लैपटॉप देने के लिए दो साल में सरकार ने 330 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है।
स्कूल व यूनिवर्सिटी के छात्रों को राज्य सरकार ने दस के बजाय 14 इंच का लैपटॉप देने का फैसला किया है, ताकि छात्रों के लिए यह बहुउपयोगी हो सके। छात्रों को लैपटॉप देने के लिए दो साल में सरकार ने 330 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने बजट में हर स्कूल के आठवीं कक्षा के टॉपर को लैपटॉप देने की घोषणा की थी। बाद में मुख्यमंत्री ने इस योजना का विस्तार करते हुए यूनिवर्सिटी में टॉप करने वाले छात्रों को भी लैपटाप देने की घोषणा कर दी थी। इस तरह अब राज्य सरकार छात्रों को 57 हजार लैपटॉप वितरित करेगी।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को महापुरा में जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहा कि राजस्थान के औद्योगिक घरानों का प्रदेश से आज भी मजबूत रिश्ता है। जो घराने करीब 100-150 साल पहले यहां से गए होंगे, वे देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं। उस वक्त के औद्योगिक घराने जैसे बिड़ला, बांगड़, गोयनका, पोद्दार, सिंघानिया, मोरारका, बजाज जो यहां से गए उन्होंने अपनी मेहनत से प्रदेश व देश का नाम रोशन किया।
उन्होंने राज्य सरकार का उद्देश्य अब प्रवासी राजस्थानियों से प्रदेश का रिश्ता मजबूत रखना है। जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी सम्मेलन में भी हर राज्य व दुनिया भर से प्रवासी राजस्थानी यहां आए हैं। राजस्थान के साथ उनका बांड मजबूत हुआ और निवेश भी आया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान उच्च शिक्षा के हब के रूप में उभर कर सामने आया है।
सरकारी क्षेत्र में 22, जबकि निजी क्षेत्र में 33 विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके है। करीब 3500 करोड़ रुपये का निवेश निजी विश्वविद्यालयों के रूप में हो चुका है। आज राजस्थान में कॉलेजों की संख्या 1400 पर पहुंच चुकी है। अब अन्य राज्यों के छात्र राजस्थान में पढाई करने आने लगे हैं। जे.के लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय में कम्प्यूटर लैब, कक्षा-कक्ष, हॉस्टल, कांफ्रेंस हॉल व अन्य सुविधाएं है।
इससे छात्रों को शिक्षा का बेहतर माहौल मिलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्ता युक्त शिक्षा के केंद्र बनने चाहिए। कई बार गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र आर्थिक तंगी के चलते उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाते हैं।







