झटका
वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में पॉलिसीज की संख्या 33.9 लाख घटकर रह गई 2.7 करोड़
सितंबर, 2010 में आए यूलिप के नए नियमों से बीमा कंपनियों के बिजनेस को लगा तगड़ा झटका
वर्ष 2011-12 में अब तक जारी किए गए 4.5 करोड़ से भी कम बीमा पॉलिसी
कमजोर बाजार का सेंटीमेंट और निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश का रास्ता अख्तियार करने, विकास दर में कमी की संभावना के कारण इस वर्ष में जीवन बीमा कंपनियों द्वारा पॉलिसी जारी करने की संख्या में भारी गिरावट आई है। पिछले दस वर्षों में इस वर्ष में यह सबसे बड़ी गिरावट है।
बीमा नियामक संस्था इरडा द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2005 से 2010 के बीच बीमा कंपनियों ने अच्छी पॉलिसी जारी की।
लेकिन प्रीमियम कलेक्शन के मामले में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीनों में भारी गिरावट देखी गई है। इसी वर्ष में पहले 9 महीनों में कुल पॉलिसियों की संख्या में 11 फीसदी गिरावट देखी गई है जो कि दस वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट है और यह संख्या 33.9 लाख घटकर 2.7 करोड़ रह गई है।
अगर नई पॉलिसियों का रुझान 9 महीनों के औसत से देखें तो पिछली तिमाही में भी इसमें भारी गिरावट देखी गई है। पिछले 9 वर्षों में नई पॉलिसियों के जारी करने में केवल दो फीसदी से कुछ अधिक का औसत रहा है लेकिन इस 2004-05 में 8.4 फीसदी और 2010-11 में इसमें 9.6 फीसदी की गिरावट देखी गई। अगर पहले 9 महीनों में बेची गई पॉलिसियों को कंबाइन किया जाए तो 2010-11 और 2011-12 में 19.35 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
2002-03 में कुल 2.5 करोड़ पॉलिसियां जारी की गई थी लेकिन 2009-10 में 5.3 करोड़ पॉलिसियां जारी की गई। लेकिन 2010-11 में 9.6 फीसदी की इसमें गिरावट आई और 2011-12 में यह 4.5 करोड़ से नीचे रह गई। हालांकि बीमा कंपनियों को उम्मीद है कि इस अंतिम तिमाही में कुछ जादुई करिश्मा हो जाए और यह कुछ बढ़ जाए।
एक बीमा कंपनी के अधिकारी के मुताबिक अभी इस उद्योग में स्थितियों को सेटल करने में कुछ समय लगेगा क्योंकि पहले 80-90 फीसदी व्यवसाय यूलिप से आता था, पर अब यूलिप में नए नियम आने से बीमा उद्योग पर इसका असर पड़ा है। साथ ही कंपनियों ने अपनी व्यवसायिक रणनीति भी कमीशन के कारण बदल दी है जिससे इस तरह का परिणाम दिख रहा है। यूलिप से पारंपरिक प्लान में आने पर कंपनियों को पिक अप पकडऩे में अभी समय लगेगा।