रिजर्व बैंक को दुनिया के लिए रोल मॉडल बनाना है

चार साल पहले रिजर्व बैंक को गवर्नर के रूप में ज्वाइन करते समय अपने आप को केंद्रीय बैंक की 'कम जानकारी रखने वाला' कहने वाले डी. सुब्बाराव के सामने अब लक्ष्य बिल्कुल साफ है। सुब्बाराव ने केंद्रीय बैंक के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को संदेश में कहा है कि रिजर्व बैंक को काले बक्से वाली छवि से बाहर लाना है और उसको वैश्विक स्तर पर एक आदर्श केंद्रीय बैंक के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने कहा, 'बाहर से देखने वाले किसी भी व्यक्ति को रिजर्व बैंक एक काले बक्से की तरह लगता है। हर कोई जानता है कि यहां काम करने वाले व्यक्ति कुछ खास करते हैं, लेकिन उस काम और अपनी जिंदगी के बीच जुड़े रिश्ते को वे नहीं समझ पाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि हम सब रिजर्व बैंक पर पड़े इस रहस्य के पर्दे को हटाएं ताकि लोग इसके बारे में ज्यादा जान सकें और हमसे हमारी जिम्मेदारी की मांग कर सकें।'
सुब्बाराव ने कहा कि स्वायत्तता के लिए मुआवजा की तरह है जवाबदेही। हमें इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होना होगा कि हम ऐसे टेक्नोक्रेट का समूह हैं जो गैर-निर्वाचित होते हुए भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक नीतियां तय कर रहे हैं। हमें अपने काम का बचाव करना होगा और स्पष्टीकरण भी देना होगा। हमें हमारी नीतियों पर जो प्रतिक्रिया मिलती है उससे भी सीखने की जरूरत है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि आप में से बहुत लोग अपने पूरे कैरियर से यहां हैं, ऐसे में इस बात का अहसास आपको नहीं है कि यह (रिजर्वबैंक की जिम्मेदारी) कितनी महत्वपूर्ण है। लेकिन मुझे इस बात का अहसास है क्योंकि मैं अपने कैरियर के बहुत सालों तक इससे बाहर था। मुझे उम्मीद हैकि आने वाले कुछ वर्षों में जो भी हमारी समीक्षा करेगा वह आरबीआईको केंद्रीय बैंक के रूप में रोल मॉडल मानेगा। सुब्बाराव ने सितंबर 2008 में रिजर्वबैंक के गवर्नर का पद संभाला था।
हमें इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होना होगा कि हम ऐसे टेक्नोक्रेट का समूह हैं जो गैर-निर्वाचित होते हुए भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक नीतियां तय कर रहे हैं। हमें अपने काम पर स्पष्टीकरण देना होगा। हमें हमारी नीतियों पर जो प्रतिक्रिया मिलती है उससे भी सीखने की जरूरत है - डी. सुब्बाराव,
गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक







