जो व्यक्ति वक्त निकाल कर चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम को गंभीर बीमारी और दुर्घटना बीमा सहित टर्म इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंडों में लगाता है, उसे अधिक सुरक्षा के साथ बेहतर रिटर्न भी प्राप्त हो सकता है।
एक आम आदमी बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए सबसे अधिक भरोसा जीवन बीमा कंपनियों की चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी पर करता है। चाइल्ड पॉलिसी बच्चों का भविष्य आर्थिक दृष्टि से सुरक्षित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक आम आदमी के लिए चाइल्ड प्लान बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें माता-पिता के जीवन बीमा के साथ परिपक्वता पर एकमुश्त राशि मिल जाती है। हालांकि, वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि जो व्यक्ति वक्त निकाल कर चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम को गंभीर बीमारी और दुर्घटना बीमा सहित टर्म इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंडों में लगाता है, उसे अधिक सुरक्षा के साथ बेहतर रिटर्न भी प्राप्त हो सकता है।
आर्क फाइनैंशियल प्लानर के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हेमंत बेनीवाल कहते हैं कि यह सच है कि जीवन बीमा कंपनियों के चाइल्ड प्लान कई सुविधाएं देती हैं लेकिन ग्राहकों को यह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि इनके लिए आपको अच्छा-खासा शुल्क चुकाना होता है। मार्वेल इंवेस्टमेंट के सर्टिफायड फाइनैंशियल प्लानर मणिकरण सिंघल के अनुसार, यूलिप के नए नियम लागू होने के बावजूद अगर आप गणना कर देखें तो परिपक्वता पर मिलने वाली राशि में कोई खासा अंतर नहीं दिखता। लेकिन एक आम आदमी दीर्घावधि के लिहाज से नए लॉन्च हुए चिल्ड्रेन प्लान का चुनाव कर सकता है। इन पॉलिसी की सबसे बड़ी खासियत होती है कि पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद भविष्य के प्रीमियम का भुगतान कंपनियां प्रीमियम वेवर राइडर के तहत करती है।
हाल में लॉन्च हुए मैक्स न्यू यॉर्क लाइफ के शिक्षा प्लस-2 पॉलिसी की बात करें तो इसके तहत वेवर ऑफ प्रीमियम का लाभ तो है ही। पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर 100 फीसदी सम एश्योर्ड का भुगतान परिवार को कर दिया जाता है। इसके बाद भविष्य के प्रीमियम का भुगतान कंपनी करती है और परिपक्वता पर बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए फंड वैल्यू का भुगतान करती है। इसके अलावा पॉलिसीधारक की मृत्यु होने के 10 साल बाद तक कंपनी प्रत्येक वर्ष सम एश्योर्ड के 10 प्रतिशत का भुगतान बच्चे के स्कूल फीस के लिए करती है। हालांकि, यह लाभ सम एश्योर्ड के 100 फीसदी और पॉलिसी अवधि तक के लिए सीमित है। सिंघल के अनुसार, अगर किसी एजेंट ने आपको अपनी जाल में फांस कर पॉलिसी बेची है तो नए नियमों ने पॉलिसी से निकासी का रास्ता आसान कर दिया है। यूलिप के तहत पांच साल बाद निकासी पर कोई सरेंडर शुल्क नहीं देना होगा, लेकिन निकासी से पहले फंड वैल्यू जरूर देख लें।
बेनिवाल कहते हैं, चाइल्ड प्लान खासियतों की वजह से भले आकर्षक दिखते हों लेकिन पर्याप्त बीमा कवर पाने के लिए भारी प्रीमियम देना होता है। इसके एक-चौथाई प्रीमियम में दोगुना टर्म इंश्योरेंस कवर पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अगर चाइल्ड प्लान के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम का शेष हिस्सा पीपीएफ में भी लगाया जाए तो प्रतिफल कहीं अधिक मिलेगा। वैसे, दीर्घावधि के निवेश के नजरिये से इक्विटी सबसे बेहतर प्रतिफल उपलब्ध कराते हैं। सिंघल के अनुसार, यह देखना चाहिए कि बाजार के उतार-चढ़ाव के दिनों में फंड-स्विचिंग की सुविधा है या नहीं। लंबी अवधि में इक्विटी बेहतर रिटर्न देते हैं इसलिए चाइल्ड प्लान लेने वालों को 100 फीसदी इक्विटी में निवेश करने वाले फंड का चुनाव करना चाहिए।
वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि बीमा और निवेश दोनों अलग-अलग चीजें और इन्हें मिलाना नहीं चाहिए। बीमा योजनाएं निवेश के उचित विकल्प नहीं हो सकते, इनका इस्तेमाल बीमा के लिए ही किया जाए तो बेहतर है।