रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक को पैसा उधार देते हैं। इस पैसे पर रिजर्व बैंक उधार देने वाले बैंकों को ब्याज देता है। अगर आसान शब्दों में कहा जाए तो जिस ब्याज दर पर रिजर्व बैंक दूसरे वाणिज्यिक बैंकों से पैसा उधार लेता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है। यह बाजार में तरलता पर नियंत्रण रखने का रिजर्व बैंक का एक महत्वपूर्ण टूल है।
जब कभी बाजार में तरलता ज्यादा होती है तो रिजर्व बैंक रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है। इससे पैसा बाजार से निकलकर केंद्रीय बैंक के पास आ जाता है जिससे बाजार में तरलता कुछ कम हो जाती है। इस उधार के बदले में रिजर्व बैंक अपनी सिक्यूरिटीज को इन बैंकों के पास रखता है। दरअसल इसके जरिये रिजर्व बैंक महंगाई पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता है।
जब बाजार में ज्यादा तरलता हो जाती है तो केंद्रीय बैंक महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए तरलता घटाने के लिए रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इसके माध्यम से रिजर्व बैंक जिस हद तक महंगाई पर नियंत्रण करना चाहता है वह उस लक्ष्य को प्राप्त कर ले लेकिन फिर भी रिवर्स रेपो रेट को महंगाई पर नियंत्रण करने का महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है। अभी हाल ही में रिजर्व बैंक ने इसे घटाकर साढ़े पांच फीसदी किया है।