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बैंकों के मुनाफे पर बढ़ेगा दबाव : आरबीआई

बिजनेस भास्कर मुंबई | Dec 29, 2012, 00:57AM IST
 
 


रिपोर्ट
जीएनपीए (सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) में बढ़ोतरी की दर क्रेडिट ग्रोथ से भी ऊपर
सितंबर 2012 तक जीएनपीए की वृद्धि दर 45.7 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है
प्रॉविजनिंग के नियमों में प्रस्तावित बदलावों से बैंकों के सामने चुनौती और बढ़ सकती है
बैंकों को कैपिटल रिस्क के वैश्विक मानकों बेसल-3 को पूरा करने में होगी परेशानी

रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाली तिमाहियों में बैंकों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ सकता है। आर्थिक सुस्ती के चलते परिसंपत्तियों की बिगड़ती गुणवत्ता इसका प्रमुख कारण हो सकती है।


रिजर्वबैंक ने अपनी ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि जीएनपीए (सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) में बढ़ोतरी की दर क्रेडिट ग्रोथ से ऊपर बनी हुई है। इसको देखते हुए आने वाली तिमाहियों में बैंकों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है। सितंबर 2012 में समाप्त चालू वित्त वर्ष के छह महीनों में बैंकों की परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में काफी गिरावट दर्जकी गई है। इस दौरान बैंकों के जीएनपीए का अनुपात तेजी से बढ़कर 3.6 फीसदी पर पहुंच गया है जो मार्च 2012 के अंत में 2.9 फीसदी था।


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में हाल ही में आई गिरावट और प्रॉविजनिंग के नियमों में प्रस्तावित बदलावों से बैंकों के सामने चुनौती बढ़ सकती है। इससे बैंकों को कैपिटल रिस्क के वैश्विक मानकों बेसल-3 को पूरा करने में परेशानी होगी।बेसल-3 को लागू करने के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं और ये चरणबद्ध तरीके से जनवरी 2013 से प्रभावी हो जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की एसेट क्वालिटी में ज्यादा गिरावट इस दौरान दर्जकी गई है।


रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2012 तक जीएनपीए की वृद्धि दर 45.7 फीसदी पर पहुंच चुकी है जो इस दौरान की ग्रोस क्रेडिट ग्रोथ से भीज्यादा है। यह परिसंपत्तियों की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है।एनपीए की वसूली का अनुपात और वास्तविक उगाही में गिरावट भी इस चिंता को बढ़ा रहा है। हालांकि सितंबर 2012 तिमाही के दौरान एनपीए के अनुपात में एनपीए की वसूली में मामूली सुधार दर्जकिया गया है। कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (सीडीआर) व्यवस्था के तहत इसकी रिस्ट्रक्चरिंग भी लाइन में है।


साथ ही नॉन सीडीआर रिस्ट्रक्चरिंग में भी तेजी देखने को मिली है। सीडीआर सेल के आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि सीडीआर सेल को भेजे गए मामलों की संख्या में वित्त वर्ष 2011-12 बढ़ोतरी देखी जा रही है। 2010-11 के दौरान इससे जुड़े 49 मामले सीडीआर सेल को ट्रांसफर किए गए जिनमें 22,620 करोड़ रुपये की रकम जुड़ी थी।


वहीं, 2011-12 के दौरान इसको 87 मामले रेफर किए गए जिनसे 67,890 करोड़ रुपये की राशि संबद्ध है। चालू वित्त वर्ष2012-13 के अप्रैल-अगस्त के दौरा सीडीआर को 59 मामले रेफर किए गए जिनसे 30,640 करोड़ रुपये की रकम जुड़ी है। रिस्ट्रक्चरिंग में इस बढ़ोतरी से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता सुधारने में काफी मदद मिल रही है।

 
 
 

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