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  • बीमा कंपनी को 5 लाख मुआवजा देने का निर्देश
    CASE TWO क्या है मामला? : 2011 में बलबीर कौर की बस में आग लग गई, जिसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस ने किया था : 4.9 लाख रुपये चुकाने की पेशकश बीमा कंपनी ने की कौर के दावा करने पर, लेकिन दिया नहीं : 12 लाख रुपये का दावा करते हुए कौर ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत की : कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि कौर ने जाली दस्तावेज पेश किया बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो जल्दबाजी दिखाती हैं, लेकिन मुआवजा देने में आनाकानी करती हैं। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली के एक कंज्यूमर फोरम ने बीमा कंपनी को बतौर सेटलमेंट एक महिला को 5 लाख रुपये...
    April 20, 10:59 AM
  • ट्रक-बसों पर बीमा हल्का, कारों पर भारी (थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम)
    यह अजीब गणित है, ट्रक-बस जैसे पब्लिक वाहनों के थर्ड पार्टी बीमा के दावे ज्यादा होते हैं। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को इनके दावों का ज्यादा वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है। लेकिन हर साल की तरह इरडा ने वित्त वर्ष 2014-15 के लिए इन वर्गों के वाहनों पर प्रीमियम कम बढ़ाया। दूसरी ओर प्राइवेट कारों और टैक्सियों के थर्ड पार्टी बीमा के दावे कम रहते हैं, लेकिन इनका प्रीमियम दोगुना बढ़ाया गया। दशकों से हो रहे इस भेदभाव पर के. के. कुलश्रेष्ठ की रिपोर्ट... इंश्योरेंस डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने वित्त वर्ष...
    April 19, 11:43 AM
  • एजेंट से हासिल करें पूरी जानकारी
    ज्यादातर लोग म्यूचुअल फंडों में निवेश के लिए एजेंटों का सहारा लेते हैं। लोग ऐसे एजेंटों पर भरोसा करते हैं और कई बार ऐसी योजनाओं में ही निवेश करते हैं जिनकी सलाह एजेंट देते हैं।एजेंटों की सलाह पर गौर करना एक तरह से ठीक है क्योंकि वे इस फील्ड के अनुभवी लोग होते हैं, लेकिन आपको ऐसे एजेंटों से तमाम तरह के सवालात कर यह जरूर पुख्ता कर लेना चाहिए कि एजेंट जानकार और सही व्यक्ति है या नहीं।यही नहीं, आप जिस स्कीम में निवेश करने जा रहे हैं उसके बारे में एजेंट से हर किंतु-परंतु पर खुलकर बात करना चाहिए।...
    April 18, 03:26 AM
  • बीमा कंपनियां 10 लाख रुपये अधिकतम सीमा तय करने की मांग कर रहीं
    बिजनेस भास्कर : नई दिल्ली... थर्ड पार्टी प्रीमियम रेट नियंत्रण मुक्त करने पर कंपनियां मुआवजा राशि अधिकतम 10 लाख रुपये तय करने की मांग कर रही हैं। इसके लिए संसद से कानून में आवश्यक संशोधन करना होगा। लेकिन इसका गंभीर मानवीय पहलू भी है। कोई दुर्घटना होती है, तो पीडि़त व्यक्ति को हुए नुकसान की सीमा तय करने से कंपनियां तो बच जाएंगी, लेकिन पीडि़त व्यक्तियों की पीड़ा और बढ़ सकती है। अगर यह कानून पास होता है तो बीमा कंपनियां अधिकतम 10 लाख रुपये मुआवजा देकर बच जाएंगी। अगर पीडि़त व्यक्ति को दुर्घटना से...
    April 17, 09:36 AM
  • बीमा कंपनियों को पब्लिक वाहनों के बीमा व्यवसाय में ही ज्यादा घाटा हो रहा है। पब्लिक और प्राइवेट वाहनों को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के लिए अलग-अलग पूल बनाने का मकसद भी यही है कि उनके अलग-अलग क्लेमों के अनुसार प्रीमियम दरें तय हो सकें। इस लिहाज से ट्रक, बस और दूसरे पब्लिक वाहनों पर बीमा का प्रीमियम इस वर्ग के दावों के वित्तीय बोझ के आधार पर होना चाहिए। इसी तरह प्राइवेट वाहनों जैसे कार आदि का प्रीमियम इस वर्ग के दावों के वित्तीय बोझ के आधार पर तय किया जाना चाहिए। लेकिन ट्रक और बस ट्रांसपोर्टरों के...
    April 17, 09:33 AM
  • बीमा कंपनियों पर ट्रांसपोर्टरों का दबाव आगे भी पड़ेगा इरडा ने वर्ष 2015 से मोटर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की प्रीमियम दरों को नियंत्रण मुक्त करने की योजना बनाई है। सिर्फ मोटर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की दरें इरडा तय करता है और सभी कंपनियों को इसी के अनुसार प्रीमियम वसूलना होता है। नए प्रस्ताव के अनुसार कंपनियां खुद प्रीमियम दरें तय कर सकेंगी। इससे प्रीमियम दरों में स्पर्धा होने की संभावना है। लेकिन इस प्रस्ताव पर बीमा कंपनियां की कुछ आपत्तियां है। वैसे भी मोटर इंश्योरेंस एक्ट में आवश्यक...
    April 17, 09:32 AM
  • ट्रक-बसों की मजबूत लॉबियों के दबाव में नहीं बढ़ पाता प्रीमियम: कंपनियां थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम को लेकर साधारण बीमा कंपनियां बीमा नियामक इरडा के तौर-तरीकों से सहमत नहीं हैं। बीमा कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर अगर ध्यान दें तो अहसास होगा कि बसों और ट्रकों का प्रीमियम निजी कार की तुलना में काफी कम बढ़ा है। जबकि बसों और ट्रकों के दावे काफी होते हैं। वहीं निजी कारों का क्लेम इसकी तुलना में काफी कम होता है, लेकिन उनका प्रीमियम हर साल काफी...
    April 17, 09:32 AM
  • बढ़ रहा है सीनियर सिटिजन होम का ट्रेंड
    सीनियर सिटिजन हाउसिंग प्रोजेक्ट जैसे वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्ग में भारत में काफी संभावनाएं हैं। ऐसी उम्मीद है कि इस श्रेणी में निजी डेवलपर अच्छा-खासा निवेश करेंगे क्योंकि वे पारंपरिक रियल एस्टेट एसेट क्लास से आगे सोचेंगे और ऐसे ही नये क्षेत्रों में विस्तार पर विचार करेंगे। एक तरफ, जहां ऐसे नये फॉर्मेट के रियल एस्टेट के विस्तार में अन्य फॉर्मेट जैसे टेक पार्क और लॉजिस्टिक्स पार्क के मुकाबले कम तेजी से विस्तार होगा लेकिन लंबी अवधि में मांग को देखते हुए इस श्रेणी का निश्चित तौर पर व्यापक...
    April 16, 02:30 AM
  • सरकारी बीमा कंपनियों का स्वास्थ्य बीमा महंगा होने के बाद अब निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियां भी ग्राहकों को झटका देने जा रहीं हैं। निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोंबार्ड ने सालाना 15-18 फीसदी मेडिकल इंफ्लेशन का हवाला देते हुए प्रीमियम 20 फीसदी बढ़ा दिया है। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस और भारती अक्सा जनरल इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ाने पर विचार कर रहीं हैं। आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस के हेड अंडराइटिंग एंड क्लेम्स, संजय दत्ता का कहना है कि हमने पिछले छह वर्ष के दौरान...
    April 15, 06:59 PM
  • आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार है जीवन बीमा
    जीवन बीमा न केवल परिवार को आर्थिक सुरक्षा देता है बल्कि किसी व्यक्ति की विस्तृत आर्थिक योजना को भी आसान बनाता है। इससे धन संचित करने और धन सुरक्षित रखने के साथ-साथ लिक्विडिटी की सुविधा भी मिलती है। यह दीर्घावधि की क्रमबद्ध बचत की आदत को बनाता है। इससे न केवल धन संचित होती है, बल्कि यह समय के साथ धन की ग्रोथ को भी सुनिश्चित करता है ताकि आपके दीर्घावधि के लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम हों। फाइनेंशियल प्लानिंग का प्राथमिक उद्देश्य होता है अपने परिवार को तात्कालिक और भविष्य की अप्रत्याशित...
    April 15, 11:22 AM
  • स्वास्थ्य बीमा सेहत का रखे ख्याल
    आज स्वास्थ्य संबंधी उपचार काफी महंगा है। लोग अपनी वास्तविक बीमारी से उतने दबाव में नहीं आते जितना कि चिकित्सा बिलों को देखकर आ जाते हैं। ऐसी चिंताओं से बचने का बेहतर उपाय होता है स्वास्थ्य अथवा चिकित्सा बीमा पॉलिसी लेना। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी न केवल अस्पताल में भर्ती होने के दौरान हुए खर्च को बल्कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले और उसके बाद के खर्च को भी कवर करती है। बहुत सी बीमा पॉलिसियों में चिकित्सा जांच पर और दवाइयां खरीदने पर खर्च हुआ पैसा भी शामिल हो सकता है। आजकल स्वास्थ्य बीमा...
    April 15, 11:20 AM
  • सबसे पहले किसी ग्राहक को इस बात की जांच करनी चाहिए कि वह जिस प्रोडक्ट की तलाश कर रहा है वह बीमा कंपनी के पास है या नहीं। यद्यपि, बीमा कंपनियों के पास तमाम तरह के प्रोडक्ट होते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि उनके सभी प्रोडक्ट अपनी श्रेणी में अव्वल ही हों। उदाहरण के तौर पर जरूरी नहीं कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी सबसे अच्छा टै्रवल इंश्योरेंस भी देती हो। आपको प्रोडक्ट के फीचर्स की तुलना अपनी जरूरत के हिसाब से करनी चाहिए और जो पॉलिसी इस मानदंड पर खरी उतरती हो उसे शॉर्ट लिस्ट करनी चाहिए। इसके अलावा आपको...
    April 15, 10:34 AM
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